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philosophy

श्रीमद् भगवद् गीता

श्रीमद्भगवद्गीता

smritiSanskrit

भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश

18 अध्याय701 श्लोकVyasac. 5th–2nd century BCE
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परिचय

कुरुक्षेत्र के रणभूमि में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया कर्म, भक्ति एवं ज्ञान का अमर उपदेश — 18 अध्यायों में।

अन्य नाम

Bhagavad Gitaभगवद्गीताGitaगीताGitopanishad

अध्याय

01

अर्जुनविषाद योग

अध्याय 1 — अर्जुनविषाद योग।

02

सांख्य योग

अध्याय 2 — सांख्य योग।

03

कर्म योग

अध्याय 3 — कर्म योग।

04

ज्ञान-कर्म-संन्यास योग

अध्याय 4 — ज्ञान-कर्म-संन्यास योग।

05

कर्म संन्यास योग

अध्याय 5 — कर्म संन्यास योग।

06

आत्मसंयम (ध्यान) योग

अध्याय 6 — आत्मसंयम (ध्यान) योग।

07

ज्ञान-विज्ञान योग

अध्याय 7 — ज्ञान-विज्ञान योग।

08

अक्षरब्रह्म योग

अध्याय 8 — अक्षरब्रह्म योग।

09

राजविद्या-राजगुह्य योग

अध्याय 9 — राजविद्या-राजगुह्य योग।

10

विभूति योग

अध्याय 10 — विभूति योग।

11

विश्वरूप दर्शन योग

अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग।

12

भक्ति योग

अध्याय 12 — भक्ति योग।

13

क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग

अध्याय 13 — क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग।

14

गुणत्रय विभाग योग

अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग।

15

पुरुषोत्तम योग

अध्याय 15 — पुरुषोत्तम योग।

16

दैवासुर-संपद्-विभाग योग

अध्याय 16 — दैवासुर-संपद्-विभाग योग।

17

श्रद्धात्रय विभाग योग

अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग।

18

मोक्ष-संन्यास योग

अध्याय 18 — मोक्ष-संन्यास योग।